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ambedkar smaarak in lucknow
मायाबती जी इन दिनो लखनऊ में अंबेडकर स्मारक बनबा रही हैं. पहले से निर्मित ये स्मारक तोड़-तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है. जितनी बार ये सत्ता में आएगीं,यही स्मारक तोड़ -तोड़कर दोबारा बनबाती रहेगीं.करोडो पहले खर्च किये थे, करोडो अब खर्च कर रही हैं . ये कारनामा इतिहास में जितने भारी शब्दों मे लिखा जाएगा उसके बोझ से आज पूरा उ.प्र. दबा है.
जो खर्च विकास कि बड़ी योजनाओं पर होना चाहिए था वो अंबेडकर स्मारक के पुनर्- निर्माड़ में हो रहा है.
इनकी सनक मो.तुग़लक़ की सनक से भी बड़ी है.
ये जनता का पैसा है, जो इनकी सनक पर खर्च हो रहा है.
लखनऊ में गोमतीनगर का अधूरा पुल मायाबती जी को भले ही न दिखे, लेकिन अंबेडकर स्मारक की चारदीवारी के गुलाबी पत्थरों के नीचे दबी उ.प्र. की तकलीफें और संसाधन हीनता आगे सबको नज़र आएगी.
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